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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Jul 2022

    जीना आसान कर लिया है!

    आख़िर हटा दीं हमने भी ज़ेहन से किताबें, हमने भी अपना जीना आसान कर लिया है| राजेश रेड्डी

  • 27th Jul 2022

    अपनी पहचान कर लिया है!

    लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है, अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है| राजेश रेड्डी

  • 27th Jul 2022

    जिन पे उन्हें आँसू बहाने चाहिएँ!

    बार-हा ख़ुश हो रहे हैं क्यूँ इन्ही बातों पे लोग, बार-हा जिन पे उन्हें आँसू बहाने चाहिएँ| राजेश रेड्डी

  • 27th Jul 2022

    मैंने समुद्र में अपना जाल फेंका!

    आज पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया…

  • 26th Jul 2022

    फिर सपने सजाने चाहिएँ!

    रोज़ इन आँखों के सपने टूट जाते हैं तो क्या, रोज़ इन आँखों में फिर सपने सजाने चाहिएँ| राजेश रेड्डी

  • 26th Jul 2022

    इसे हर दिन फ़साने चाहिएँ!

    तुम हक़ीक़त को लिए बैठे हो तो बैठे रहो, ये ज़माना है इसे हर दिन फ़साने चाहिएँ| राजेश रेड्डी

  • 26th Jul 2022

    अस्पताल से वापसी!

    आज एक सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद घर वापसी हो गई, टाइफाइड का बुखार जिसने पहले एक सप्ताह तक घर पर परेशान किया, बाद में टेस्ट कराने पर उसकी पुष्टि हुई अन्यथा शुरू में मैं इसको वायरल फीवर मानते हुए ही गंभीरता से नहीं ले रहा था| खैर बहुत दिनों से अस्पताल…

  • 26th Jul 2022

    सच बोलकर दुश्मन कमाने चाहिएँ!

    दोस्तों का क्या है वो तो यूँ भी मिल जाते हैं मुफ़्त, रोज़ इक सच बोलकर दुश्मन कमाने चाहिएँ| राजेश रेड्डी

  • 20th Jul 2022

    आसमानों के ख़ज़ाने चाहिएँ!

    कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिएँ, कुछ को लेकिन आसमानों के ख़ज़ाने चाहिएँ| राजेश रेड्डी

  • 20th Jul 2022

    नामांकन!

    आज फिर से मैं हमारे राष्ट्रकवि के रूप में सम्मान पाने वाले स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| दिनकर जी ने सामान्यतः लंबी लंबी कविताएं और काव्य लिखे हैं|लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की प्रेम पर लिखी यह छोटी परंतु असरदार रचना – सिंधुतट…

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