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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st Jul 2022

    उसको ज़माने ठहर के देखते हैं!

    रुके तो गर्दिशें उसका तवाफ़ करती हैं, चले तो उसको ज़माने ठहर के देखते हैं| अहमद फ़राज़

  • 31st Jul 2022

    उसके बदन की तराश ऐसी है!

    सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है, कि फूल अपनी क़बाएँ कतर के देखते हैं| अहमद फ़राज़

  • 31st Jul 2022

    बहार पे इल्ज़ाम धर के देखते हैं!

    सुना है उसके लबों से गुलाब जलते हैं, सो हम बहार पे इल्ज़ाम धर के देखते हैं| अहमद फ़राज़

  • 31st Jul 2022

    आह भर के देखते हैं!

    सुना है उसकी सियह-चश्मगी क़यामत है, सो उसको सुरमा-फ़रोश आह भर के देखते हैं| अहमद फ़राज़

  • 31st Jul 2022

    हिरन दश्त भर के देखते हैं!

    सुना है हश्र हैं उसकी ग़ज़ाल सी आँखें, सुना है उसको हिरन दश्त भर के देखते हैं| अहमद फ़राज़

  • 31st Jul 2022

    चूड़ी का टुकड़ा!

    आज एक बार फिर से मैं अज्ञेय जी द्वारा संपादित एक समय के प्रतिनिधि कवियों काव्य संकलन ‘तारसप्तक’ में शामिल रहे स्वर्गीय गिरिजा कुमार माथुर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में शामिल की हैं| सफलता के संकल्प वाला प्रसिद्ध गीत ‘हम होंगे कामयाब’…

  • 30th Jul 2022

    जुगनू ठहर के देखते हैं!

    सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं, सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं| अहमद फ़राज़

  • 30th Jul 2022

    रात उसे चाँद तकता रहता है!

    सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है, सितारे बाम-ए-फ़लक से उतर के देखते हैं| अहमद फ़राज़

  • 30th Jul 2022

    चलो बात कर के देखते हैं!

    सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं, ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं| अहमद फ़राज़

  • 30th Jul 2022

    गली से गुज़र के देखते हैं!

    सुना है दर्द की गाहक है चश्म-ए-नाज़ उसकी, सो हम भी उसकी गली से गुज़र के देखते हैं| अहमद फ़राज़

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