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लोगों से याराना चाहिए!
चौराहे बाग़ बिल्डिंगें सब शहर तो नहीं, कुछ ऐसे वैसे लोगों से याराना चाहिए| निदा फ़ाज़ली
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घटा को बरस जाना चाहिए!
झुकती हुई नज़र हो कि सिमटा हुआ बदन, हर रस-भरी घटा को बरस जाना चाहिए| निदा फ़ाज़ली
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ख़ुद से उलझ जाना चाहिए!
यूँ तो क़दम क़दम पे है दीवार सामने, कोई न हो तो ख़ुद से उलझ जाना चाहिए| निदा फ़ाज़ली
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मंदिर!
लंबे समय के बाद आज फिर से मैं छायावाद युग के प्रमुख कवि स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| प्रसाद जी की अनेक रचनाएं राष्ट्र की धरोहर हैं| इस कविता में ईश्वर के प्रति, आस्था के प्रति प्रश्न उठाने वाले लोगों को प्रसाद जी ने समुचित उत्तर दिया है, भले…
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शम-ए-तरब बुझी नहीं है!
दिल में जो जलाई थी किसी ने, वो शम-ए-तरब* बुझी नहीं है|*Lamp Of Joy अली सरदार जाफ़री