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नया ज़ाइक़ा निकल आया!
कुछ आज अश्कों की लज़्ज़त नई नई सी है, पुराने ग़म का नया ज़ाइक़ा निकल आया| राजेश रेड्डी
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दोस्त मिरा आईना निकल आया!
इक और नाम जुड़ा दुश्मनों के नामों में, इक और दोस्त मिरा आईना निकल आया| राजेश रेड्डी
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जंगल घना निकल आया!
दुखों की झाड़ियाँ उगती चली गईं दिल में, हर एक झाड़ी से जंगल घना निकल आया| राजेश रेड्डी
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यात्रा में ग़ुल खिलेंगे!
आज एक बार फिर से यात्रा के अनुभव का ज़िक्र कर लेता हूँ| इस यात्रा में मंजिल महत्वपूर्ण नहीं है, वैसे अधिकतर यात्रा का अनुभव ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, मंज़िल तो कोई न कोई चुनकर ही हम निकलते हैं| हाँ तो 11 फरवरी’23 को मैं यात्रा पर निकला, गोवा से मुंबई होकर भोपाल जाना…
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अनुपस्थिति सूचना !
एक बार फिर से मैं 11 से 17 फरवरी तक बाहर, भोपाल एरिया में रहूँगा| मैं अब इतनी अवधि के लिए बाहर जाने पर लैपटॉप साथ नहीं ले जाता और सोशल मीडिया का उपयोग मैं लैपटॉप पर ही करता हूँ| इस प्रकार 11 से 17 तक मैं यहाँ ऑनलाइन नहीं रहूँगा| ब्लॉगिंग भी नहीं कर…
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किसी और का निकल आया!
मेरे ही नाम की तख़्ती लगी थी जिस दर पर, वो जब खुला तो किसी और का निकल आया| राजेश रेड्डी
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नया रास्ता निकल आया!
सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया, भटक गया तो नया रास्ता निकल आया| राजेश रेड्डी
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कहाँ है लेकिन मेरे जैसा और!
औरों जैसे और न जाने कितने हैं, कोई कहाँ है लेकिन मेरे जैसा और| राजेश रेड्डी
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मेरी मंज़िल और है मेरा रस्ता और!
अजब मुसाफ़िर हूँ मैं मेरा सफ़र अजीब, मेरी मंज़िल और है मेरा रस्ता और| राजेश रेड्डी
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ख़ुश होना तो दूर रहा!
सच कहने पर ख़ुश होना तो दूर रहा, किया ज़माने ने मुझ को शर्मिंदा और| राजेश रेड्डी