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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Aug 2022

    लहजा बदल के देखते हैं!

    अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं, ‘फ़राज़’ अब ज़रा लहजा बदल के देखते हैं| अहमद फ़राज़

  • 20th Aug 2022

    न रोएगा तो मर जाएगा!

    ज़ब्त लाज़िम है मगर दुख है क़यामत का ‘फ़राज़,’ ज़ालिम अब के भी न रोएगा तो मर जाएगा| अहमद फ़राज़

  • 20th Aug 2022

    तिरी दहलीज़ पे धर जाएगा!

    ज़िंदगी तेरी अता है तो ये जाने वाला, तेरी बख़्शिश तिरी दहलीज़ पे धर जाएगा| अहमद फ़राज़

  • 20th Aug 2022

    कश्ती को उछाला दे दूँ!

    डूबते डूबते कश्ती को उछाला दे दूँ, मैं नहीं कोई तो साहिल पे उतर जाएगा| अहमद फ़राज़

  • 20th Aug 2022

    ख़ुद को भी देखेगा तो डर जाएगा!

    इतना मानूस न हो ख़ल्वत-ए-ग़म से अपनी, तू कभी ख़ुद को भी देखेगा तो डर जाएगा| अहमद फ़राज़

  • 20th Aug 2022

    गुज़रता है गुज़र जाएगा!

    आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा, वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा| अहमद फ़राज़

  • 20th Aug 2022

    दान!

    आज मैं छायावाद युग के एक और प्रमुख कवि स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| निराला जी ‘राम की शक्ति पूजा’ तथा अन्य अनेक ऐसी श्रेष्ठ रचनाएं लिखकर भारतीय साहित्य में अमर हो गए थे| आज की रचना में ढोंगी दानवीरों को दर्शाया गया है जो हट्टे-कट्टे बंदरों को…

  • 19th Aug 2022

    अब ख़ुशी है न कोई!

    अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला, हमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Aug 2022

    नहीं हो तो बुझ जाना चाहिए!

    बिजली का क़ुमक़ुमा न हो काला धुआँ तो हो, ये भी अगर नहीं हो तो बुझ जाना चाहिए| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Aug 2022

    कोई दीवाना चाहिए!

    चुप चुप मकान रास्ते गुम-सुम निढाल वक़्त, इस शहर के लिए कोई दीवाना चाहिए| निदा फ़ाज़ली

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