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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Sep 2022

    अपने अमल का हिसाब क्या देते!

    किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते, सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते| मुनीर नियाज़ी

  • 5th Sep 2022

    पात झरे, फिर-फिर होंगे हरे!

    आज मैं हिन्दी के प्रतिष्ठित नवगीतकार श्री ठाकुर प्रसाद सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ|लीजिए आज प्रस्तुत है श्री ठाकुर प्रसाद सिंह जी का यह नवगीत – पात झरे, फिर-फिर होंगे हरे साखू की डाल पर उदासे मनउन्मन का क्या होगापात-पात पर अंकित चुम्बनचुम्बन का क्या होगामन-मन पर डाल दिए बन्धनबन्धन का…

  • 4th Sep 2022

    इक समुंदर कह रहा था-

    मैंने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया, इक समुंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 4th Sep 2022

    ठोकर लगानी चाहिए!

    ज़िंदगी है इक सफ़र और ज़िंदगी की राह में, ज़िंदगी भी आए तो ठोकर लगानी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 4th Sep 2022

    तुम्हें क़ीमत लगानी चाहिए!

    मेरी क़ीमत कौन दे सकता है इस बाज़ार में, तुम ज़ुलेख़ा हो तुम्हें क़ीमत लगानी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 4th Sep 2022

    थोड़ी धूप आनी चाहिए!

    मैंने ऐ सूरज तुझे पूजा नहीं समझा तो है, मेरे हिस्से में भी थोड़ी धूप आनी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 4th Sep 2022

    दुश्मन ख़ानदानी चाहिए!

    सिर्फ़ ख़ंजर ही नहीं आँखों में पानी चाहिए, ऐ ख़ुदा दुश्मन भी मुझको ख़ानदानी चाहिए| राहत इंदौरी

  • 4th Sep 2022

    ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे!

    मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को, समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे| राहत इंदौरी

  • 4th Sep 2022

    हाथ लगा तो निचोड़ दूँगा उसे!

    पसीने बाँटता फिरता है हर तरफ़ सूरज, कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूँगा उसे| राहत इंदौरी

  • 4th Sep 2022

    मैं तोड़ फोड़ दूँगा उसे!

    बदन चुरा के वो चलता है मुझ से शीशा-बदन, उसे ये डर है कि मैं तोड़ फोड़ दूँगा उसे| राहत इंदौरी

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