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कई और फ़साने निकले!
दिल में झाँका तो बहुत ज़ख़्म पुराने निकले, इक फ़साने से कई और फ़साने निकले| रज़ा अमरोहवी
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डूब गया दिन
लंबे समय के बाद आज मैं एक बार फिर हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| ओम प्रभाकर जी का एक नवगीत मुझे अत्यंत प्रिय है- ‘यात्रा के बाद भी पथ साथ रहते हैं’| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत – डूब…