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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Mar 2023

    शहर में तो दुकानों में बट गया!

    इक इश्क़ नाम का जो परिंदा ख़ला में था, उतरा जो शहर में तो दुकानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया!

    गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया, होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Mar 2023

    गीत गुणनफल के!

    स्वर्गीय रमेश रंजक जी अत्यंत समर्थ नवगीतकार थे जिन्होंने कुछ कालजयी नवगीत लिखे हैं| मैंने पहले भी रंजक जी की कुछ रचनाएं शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक और नवगीत – गीत गुणनफल केसम्बोधन कल केडूब गए धार में फिसल के मछली थी बाँह की प्रियाक्यों मन को…

  • 6th Mar 2023

    गलियाँ बड़ी सुनसान हैं आए कोई!

    कोई आहट कोई आवाज़ कोई चाप नहीं, दिल की गलियाँ बड़ी सुनसान हैं आए कोई| परवीन शाकिर

  • 6th Mar 2023

    उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई!

    अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं, अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई| परवीन शाकिर

  • 6th Mar 2023

    फूलों को किताबों में न रक्खे कोई!

    मैं तो उस दिन से हिरासाँ हूँ कि जब हुक्म मिले, ख़ुश्क फूलों को किताबों में न रक्खे कोई| परवीन शाकिर

  • 6th Mar 2023

    न कभी टूट के बिखरे कोई!

    जिस तरह ख़्वाब मिरे हो गए रेज़ा रेज़ा, उस तरह से न कभी टूट के बिखरे कोई| परवीन शाकिर

  • 6th Mar 2023

    तिरा नाम न पढ़ ले कोई!

    काँप उठती हूँ मैं ये सोच के तन्हाई में, मेरे चेहरे पे तिरा नाम न पढ़ ले कोई| परवीन शाकिर

  • 6th Mar 2023

    बिखरने से न रोके कोई!

    अक्स-ए-ख़ुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई, और बिखर जाऊँ तो मुझको न समेटे कोई| परवीन शाकिर

  • 6th Mar 2023

    क्या मुझको बहाल कर दिया!

    मुद्दतों बा’द उसने आज मुझसे कोई गिला किया, मंसब-ए-दिलबरी पे क्या मुझको बहाल कर दिया| परवीन शाकिर

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