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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Sep 2022

    फिर मुलाक़ात होगी!

    मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी, किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी| बशीर बद्र

  • 15th Sep 2022

    न बादल घिरेंगे न बरसात होगी!

    सदाओं को अल्फ़ाज़ मिलने न पाएँ, न बादल घिरेंगे न बरसात होगी| बशीर बद्र

  • 15th Sep 2022

    हमारी तुम्हारी मुलाक़ात होगी!

    जहाँ वादियों में नए फूल आए, हमारी तुम्हारी मुलाक़ात होगी| बशीर बद्र

  • 15th Sep 2022

    तुम्हें मैं मिलूँगा जहाँ रात होगी!

    चराग़ों की लौ से सितारों की ज़ौ तक, तुम्हें मैं मिलूँगा जहाँ रात होगी| बशीर बद्र

  • 15th Sep 2022

    चलो मय-कदे में वहीं बात होगी!

    परेशाँ हो तुम भी परेशाँ हूँ मैं भी, चलो मय-कदे में वहीं बात होगी| बशीर बद्र

  • 15th Sep 2022

    दूर तक रात ही रात होगी!

    चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना, बड़ी दूर तक रात ही रात होगी| बशीर बद्र

  • 15th Sep 2022

    तुम्हारी मोहब्बत अगर साथ होगी!

    मैं हर हाल में मुस्कुराता रहूँगा, तुम्हारी मोहब्बत अगर साथ होगी| बशीर बद्र

  • 15th Sep 2022

    नए लोग होंगे नई बात होगी!

    कहाँ आँसुओं की ये सौग़ात होगी, नए लोग होंगे नई बात होगी| बशीर बद्र

  • 15th Sep 2022

    एक चाय की चुस्की!

    आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का एक सुंदर नवगीत, बिना किसी भूमिका के प्रस्तुत कर रहा हूँ|| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह नवगीत – एक चाय की चुस्कीएक कहकहाअपना तो इतना सामान ही रहा । चुभन और दंशनपैने यथार्थ केपग-पग पर घेर रहेप्रेत स्वार्थ…

  • 14th Sep 2022

    ये ख़ाक-ए-रहगुज़र फिर भी!

    लिपट गया तिरा दीवाना गरचे मंज़िल से, उड़ी उड़ी सी है ये ख़ाक-ए-रहगुज़र फिर भी| फ़िराक़ गोरखपुरी

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