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सत्य!
आज मैं बाबा नागार्जुन जी की आपातकाल में लिखी गई एक और कविता शेयर कर रहा हूँ| जनकवि बाबा नागार्जुन जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए प्रस्तुत है बाबा नागार्जुन जी की यह कविता – सत्य को लकवा मार गया हैवह लंबे काठ की तरहपड़ा रहता है सारा दिन, सारी…
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मुलाक़ात की कोशिश नहीं की!
वो हमें भूल गया हो तो अजब क्या है ‘फ़राज़’, हम ने भी मेल-मुलाक़ात की कोशिश नहीं की| अहमद फ़राज़
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अपने क़बीले की हिफ़ाज़त के लिए!
कट मरे अपने क़बीले की हिफ़ाज़त के लिए, मक़्तल-ए-शहर में ठहरे रहे जुम्बिश नहीं की| अहमद फ़राज़
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दश्त पे तू ने कभी बारिश नहीं की!
ऐ मिरे अब्र-ए-करम देख ये वीराना-ए-जाँ, क्या किसी दश्त पे तू ने कभी बारिश नहीं की| अहमद फ़राज़
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ज़ख़्मों की नुमाइश नहीं की!
हम कि दुख ओढ़ के ख़ल्वत में पड़े रहते हैं, हमने बाज़ार में ज़ख़्मों की नुमाइश नहीं की| अहमद फ़राज़
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सुराही ने भी गर्दिश नहीं की!
इक तो हम को अदब आदाब ने प्यासा रक्खा, उस पे महफ़िल में सुराही ने भी गर्दिश नहीं की| अहमद फ़राज़