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शरण्य!
आज एक बार फिर से मैं आधुनिक हिन्दी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| वाजपेयी जी की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – शरण खोजते हुएफिर हम तुम्हारे पास ही आएँगे। नक्षत्रों में नहीं मिलेगा…
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तसव्वुर में हमेशा!
मुक़द्दर में लिखा कर लाए हैं हम बोरिया लेकिन, तसव्वुर में हमेशा रेशम-ओ-कम-ख़्वाब रहता है| मुनव्वर राना
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वहीं महताब रहता है!
अँधेरे और उजाले की कहानी सिर्फ़ इतनी है, जहाँ महबूब रहता है वहीं महताब रहता है| मुनव्वर राना
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दिल बे-ताब रहता है!
जुदा रहता हूँ मैं तुझ से तो दिल बे-ताब रहता है, चमन से दूर रह के फूल कब शादाब रहता है| मुनव्वर राना
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कोई रास्ता तो दे!
मैं ख़ुद ही खो गया तुझे पाने की फ़िक्र में, अब ऐ ग़म-ए-हयात कोई रास्ता तो दे| राना सहरी
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क्या है बता तो दे!
बे-शक मिरे नसीब पे रख अपना इख़्तियार, लेकिन मिरे नसीब में क्या है बता तो दे| राना सहरी
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अपना पता तो दे!
बरसों मैं तेरे नाम पे खाता रहा फ़रेब, मेरे ख़ुदा कहाँ है तू अपना पता तो दे| राना सहरी
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इच्छा-शक्ति!
आज एक बार फिर से मैं प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि और कुशल मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| चक्रधर जी की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता – ओ ठोकर !तू सोच रहीमैं बैठ जाऊंगीरोकर,भ्रम है तेराचल…
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कोई फ़ैसला तो दे!
मैंने ये कब कहा कि मिरे हक़ में हो जवाब, लेकिन ख़ामोश क्यों है कोई फ़ैसला तो दे| राना सहरी