Category: Uncategorized
-
बदल तो सकती है!
अज़ल से सोई है तक़दीर-ए-इश्क़ मौत की नींद, अगर जगाइए करवट बदल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
धूप ढल तो सकती है!
कड़े हैं कोस बहुत मंज़िल-ए-मोहब्बत के, मिले न छाँव मगर धूप ढल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
शादमाँ हो जाएँ!
अगर तू चाहे तो ग़म वाले शादमाँ हो जाएँ, निगाह-ए-यार ये हसरत निकल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
खा के ठोकरें लेकिन
उरूस-ए-दहर* चले खा के ठोकरें लेकिन, क़दम क़दम पे जवानी उबल तो सकती है| *Top of the world फ़िराक़ गोरखपुरी
-
मोह!
स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ थे, मैंने प्रसाद जी, निराला जी और महादेवी जी की कुछ रचनाएं शेयर की हैं लेकिन पंत जी की रचनाएं उस तरह शेयर नहीं कर पाया हूँ| आज मैं उनकी एक रचना शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की…
-
अहल-ए-वतन से दूर!
अहल-ए-वतन से दूर जुदाई में यार की, सब्र आ गया ‘फ़िराक़’ करामात हो गई| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
सौग़ात हो गई!
ओछी निगाह डाल के इक सम्त रख दिया, दिल क्या दिया ग़रीब की सौग़ात हो गई| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
मुझे क्या बना दिया!
ऐ सोज़-ए-इश्क़ तूने मुझे क्या बना दिया, मेरी हर एक साँस मुनाजात* हो गई| *Prayer फ़िराक़ गोरखपुरी
-
आज करामात हो गई!
वक़्त-ए-ग़ुरूब आज करामात हो गई, ज़ुल्फ़ों को उसने खोल दिया रात हो गई| फ़िराक़ गोरखपुरी