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तन्हाइयों में जल जाए!
मैं वो चराग़ सर-ए-रहगुज़ार-ए-दुनिया हूँ,जो अपनी ज़ात की तन्हाइयों में जल जाए। उबैदुल्लाह अलीम
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कुछ तो लोग कहेंगे!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मेरे स्वर में प्रस्तुत है यह गीत – कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना।फ़िल्म- अमर प्रेम का संजीदा गीतगीतकार- आनंद बक्षीसंगीतकार- राहुल देव बर्मन गायक- किशोर कुमारप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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कड़वा सत्य!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी साहित्यकार स्वर्गीय विष्णु प्रभाकर जी की रचना शेयर कर रहा हूँ। विष्णु प्रभाकर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय विष्णु प्रभाकर जी की यह कविता – एक लंबी मेजदूसरी लंबी मेजतीसरी लंबी मेजदीवारों से सटी पारदर्शी शीशेवाली अलमारियाँमेजों के दोनों ओर बैठे हैं…
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कहाँ रास्ता बदल जाए!
मोहब्बतों में अजब है दिलों को धड़का सा,कि जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए| उबैदुल्लाह अलीम
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अज़ीज़ इतना ही रक्खो!
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए,अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए| उबैदुल्लाह अलीम
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बच्चों को उछलते देखा!
आ गया याद वो बचपन का ज़माना ‘ख़ालिद’,जब कहीं फूल से बच्चों को उछलते देखा| क़ैसर ख़ालिद
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उगते देखा है जिसे!
रोज़ ये मश्रिक-ओ-मग़रिब का तमाशा क्यूँ है,उगते देखा है जिसे उस को ही ढलते देखा| क़ैसर ख़ालिद
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हम तुम एक डगर के राही!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी के गीत ‘अगर चल सको साथ चलो तुम’ का अगला भाग– हम तुम एक डगर के राही आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******
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ज़माने में उछलते देखा!
डाल दी पैरों में उस शख़्स के ज़ंजीर यहाँ,वक़्त ने जिस को ज़माने में उछलते देखा| क़ैसर ख़ालिद
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थे जो हुश्यार बहुत!
अपने जज़्बात तो मशहूर थे लेकिन हम ने,थे जो हुश्यार बहुत उन को उबलते देखा| क़ैसर ख़ालिद