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बुझा सको तो साथ बुझाओ!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी के गीत ‘अगर चल सको साथ चलो तुम’ का अंतिम भाग- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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रोया करेंगे आप भी पहरों इसी तरह!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से मेरे स्वर में प्रस्तुत है मोमिन खां मोमिन जी की ग़ज़ल जिसे ग़ुलाम अली जी ने गाया है- आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *****
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सूरज!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय विजयदेव नारायण साही जी की रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय विजयदेव नारायण साही जी की यह कविता – साधो तुमको विश्वास नहीं होगारोज़ सवेरे अभी भी सूरज निकलता हैगोल-गोल, लाल-लालउसकी बड़ी-बड़ी आँखें हैंफूले-फूले गालऔर भोला-सा मुँहमेरे…
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अगर चल सको साथ चलो तुम-3
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी के गीत का अगला भाग – मुझे ओस की बूंद समझकर प्यासी किरण रोज आती है आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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जो आग दिल में है!
हर एक लहज़ा यही आरज़ू यही हसरत,जो आग दिल में है वो शेर में भी ढल जाए। उबैदुल्लाह अलीम