Category: Uncategorized
-
राह तो एक थी!
आज एक बार फिर से मैं ‘कवियों के कवि’ कहलाने वाले स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| शमशेर जी की कुछ कविताएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की यह कविता – राह तो एक थी हम दोनों की…
-
वो धूप के छप्पर हों!
वो धूप के छप्पर हों या छाँव की दीवारें, अब जो भी उठाएँगे मिल जुल के उठाएँगे| बशीर बद्र
-
हम ओस के मोती हैं!
कह देना समुंदर से हम ओस के मोती हैं, दरिया की तरह तुझसे मिलने नहीं आएँगे| बशीर बद्र
-
आँसू नहीं आएँगे!
ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे, रोएँगे बहुत लेकिन आँसू नहीं आएँगे| बशीर बद्र