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अपने घर में ही अजनबी की तरह!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि और ग़ज़ल लेखक श्री सूर्यभानु गुप्त जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| गुप्त जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सूर्यभानु गुप्त जी की यह ग़ज़ल – अपने घर में ही अजनबी की तरहमैं सुराही में…
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ख़बर में आ गया हूँ!
मिरी शनाख़्त की ख़ातिर छपी मिरी तस्वीर, न जीते-जी सही मर के ख़बर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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मगर मैं आ गया हूँ!
ज़रा सा फ़ासला मैं ने भी तय किया तो है, अगर से दो क़दम आगे मगर मैं आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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मिरे हौसलों पे हैराँ है!
ये ज़िंदगी भी मिरे हौसलों पे हैराँ है, समझ रही थी कि मैं उस के डर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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अधर में आ गया हूँ!
ज़मीं उछाल चुकी आसमाँ ने थामा नहीं, मैं काएनात में बिल्कुल अधर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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सर में आ गया हूँ!
कुछ इस क़दर मैं ख़िरद* के असर में आ गया हूँ, सिमट के सारा का सारा ही सर में आ गया हूँ| *चतुराई राजेश रेड्डी
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रक्तमुख!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की यह कविता – कुपथ कुपथ रथ दौड़ाता जोपथ निर्देशक वह है, लाज लजाती जिसकी कृति सेधृति उपदेश वह…
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लोगों ने साथ निभाया है
इतने दिन एहसान किया दीवानों पर, जितने दिन लोगों ने साथ निभाया है| साहिर लुधियानवी
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दिल ही काम आया है!
अव्वल अव्वल जिस दिल ने बर्बाद किया, आख़िर आख़िर वो दिल ही काम आया है| साहिर लुधियानवी
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यह लिखा है पुस्तक में – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…