Category: Uncategorized
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वो मुझ से जीत भी सकता था!
मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा, वो मुझ से जीत भी सकता था जाने क्यूँ हारा| जावेद अख़्तर
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पैरों के आबले हैं हम!
ख़ुद हैं अपने सफ़र की दुश्वारी, अपने पैरों के आबले* हैं हम| *छाले जावेद अख़्तर
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अनपहचाना घाट!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा जी की यह कविता – धूप से लिपटे हुए धुएँ सरीखेकेश, सब लहरा रहे हैंप्राण तेरे स्कंध पर !! यह…
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तलवार छीन लाए हैं!
मिरे क़बीले के बच्चों के खेल भी हैं अजीब, किसी सिपाही की तलवार छीन लाए हैं| राहत इंदौरी
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वतन की ज़मीन लाए हैं!
हँसो न हम पे कि हर बद-नसीब बंजारे, सरों पे रख के वतन की ज़मीन लाए हैं| राहत इंदौरी
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जो पर्बतों के लिए!
हमारी बात की गहराई ख़ाक समझेंगे, जो पर्बतों के लिए ख़ुर्दबीन लाए हैं| राहत इंदौरी