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होंठों तक आया कई बार!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय कुमार शिव जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय कुमार शिव जी का यह नवगीत – होंठों तक आया कई बारवाणी तक पहुँच नहीं पायावो हुआ कभी भी नहीं व्यक्त !…
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यूँ बात बात पर!
कुछ एहतिराम अपनी अना का भी ‘नूर’ कर, यूँ बात बात पर न किसी की दहाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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या ज़िंदगी की क़ैद से!
या ये बता कि क्या है मिरा मक़्सद-ए-हयात, या ज़िंदगी की क़ैद से मुझ को रिहाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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गुनहगार साँस साँस!
मुजरिम है सोच सोच गुनहगार साँस साँस, कोई सफ़ाई दे तो कहाँ तक सफ़ाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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ऐ काश इस मक़ाम पे!
ऐ काश इस मक़ाम पे पहुँचा दे उस का प्यार, वो कामयाब होने पे मुझ को बधाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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निगाह को ऐसी रसाई दे!
देना है तो निगाह को ऐसी रसाई दे, मैं देखूँ आइना तो मुझे तू दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर
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पात नए आ गए!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी कविताओं को अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ में भी शामिल किया गया था| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी का यह नवगीत…
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तीरगी ये मत कहो!
दिल में अपने दर्द की छिटकी हुई है चाँदनी, हर तरफ़ फैली हुई है तीरगी ये मत कहो| जाँ निसार अख़्तर