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माँगी हुई हँसी तो नहीं
हज़ार ग़म सही दिल में मगर ख़ुशी ये है, हमारे होंटों पे माँगी हुई हँसी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
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जबीं को दर पे झुकाना
जबीं को दर पे झुकाना ही बंदगी तो नहीं, ये देख मेरी मोहब्बत में कुछ कमी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
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बिम्ब दुहरे-तिहरे!
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी नवगीत के अमर कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत – दर्द तुमने गाया क्या गीत, अधभरे घाव हरे हो…
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दिन चढ़े ही!
आज एक बार फिर से मैं प्रसिद्ध और श्रेष्ठ कवि श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी ने हमें अनेक अमर गीत दिए हैं| सोम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत –…