Category: Uncategorized
-
इक ज़रा ज़ेहन को!
दिल तो दुनिया से निकलने पे है आमादा मगर, इक ज़रा ज़ेहन को तय्यार किया जाना है| राजेश रेड्डी
-
बीमार किया जाना है!
हम तसव्वुर में बना बैठे हैं इक चारा-गर, ख़ुद को जिस के लिए बीमार किया जाना है| राजेश रेड्डी
-
दीदार किया जाना है!
शौक़ की हद को अभी पार किया जाना है, आइने में तिरा दीदार किया जाना है| राजेश रेड्डी
-
कोई अजनबी तो नहीं
तुम्हारी बज़्म में अफ़्साना कहते डरता हूँ, ये सोचता हूँ यहाँ कोई अजनबी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
-
ये ज़िंदगी तो नहीं!
ये हिज्र-ए-यार ये पाबंदियाँ इबादत की, किसी ख़ता की सज़ा है ये ज़िंदगी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
-
कहाँ ग़म-ए-जानाँ!
ग़म-ए-हबीब कहाँ और कहाँ ग़म-ए-जानाँ, मुसाहिबत है यक़ीनन बराबरी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
-
ये आशियानों के जलने
हुई जो जश्न-ए-बहाराँ के नाम से मंसूब, ये आशियानों के जलने की रौशनी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
-
हमारी पहली मुलाक़ात
मिटे ये शुबह तो ए दोस्त तुझ से बात करें, हमारी पहली मुलाक़ात आख़िरी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
-
माँगी हुई हँसी तो नहीं
हज़ार ग़म सही दिल में मगर ख़ुशी ये है, हमारे होंटों पे माँगी हुई हँसी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर