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चिड़ियों की तरह!
उड़ के इक रोज़ बहुत दूर चली जाती हैं, घर की शाख़ों पे ये चिड़ियों की तरह होती हैं| मुनव्वर राना
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घर में रहते हुए!
घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं, लड़कियाँ धान के पौदों की तरह होती हैं| मुनव्वर राना
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नववर्ष 2024!
अनेक समस्याओं से जूझते हुए, दुनिया के बहुत से क्षेत्रों में युद्ध के माहौल में यह साल गुज़र गया और अब कोरोना के मामले फिर से डराने लगे हैं| आखिर आ ही गया नया साल! एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट को संशोधित रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ| नववर्ष का शिशु, धरती पर अपने नन्हे पांव…
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तुम आ गए तो वक़्त!
वर्ना वही उजाड़ हवेली सी ज़िंदगी, तुम आ गए तो वक़्त ठिकाने से कट गया| मुनव्वर राना
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ये पेड़ सिर्फ़ बीच में!
उस पेड़ से किसी को शिकायत न थी मगर, ये पेड़ सिर्फ़ बीच में आने से कट गया| मुनव्वर राना
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कुछ मैल तो बदन का!
ऐ आँसुओ तुम्हारी ज़रूरत है अब मुझे, कुछ मैल तो बदन का नहाने से कट गया| मुनव्वर राना
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घराने से कट गया!
जोड़े की शान बढ़ गई महफ़िल महक उठी, लेकिन ये फूल अपने घराने से कट गया| मुनव्वर राना
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ज़माने से कट गया!
ये सर-बुलंद होते ही शाने से कट गया, मैं मोहतरम हुआ तो ज़माने से कट गया| मुनव्वर राना