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ग़ज़ाल मोरनी मौजें!
किसी को चलता हुआ देख लें तो चलते बनें, ग़ज़ाल मोरनी मौजें नुजूम अब्र घड़ी| शहज़ाद क़ैस
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चराग़ जुगनू शरर!
किसी के नूर को चुँधिया के देखें हैरत से, चराग़ जुगनू शरर आफ़्ताब फूल-झड़ी| शहज़ाद क़ैस
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किसी के शीरीं-लबों!
किसी के शीरीं-लबों से उधार लेते हैं, मिठास शहद रुतब चीनी क़ंद मिस्री डली| शहज़ाद क़ैस
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दूध-दूध!
आज एक बार फिर मैं भारत के राष्ट्रकवि के रूप में ख्यातिप्राप्त अत्यंत श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|दिनकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की यह कविता- पर, शिशु का क्या हाल, सीख पाया…
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गुलाब अम्बर-ओ!
गुलाब अम्बर-ओ-रैहान मोतिया लोबान, किसी की ज़ुल्फ़-ए-मो’अत्तर में सब की ख़ुशबू मिली| शहज़ाद क़ैस
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बयान कर नहीं सकते!
बयान इल्म-ए-मआ‘नी फ़साहत इल्म-ए-बलाग़, बयान कर नहीं सकते किसी की एक हँसी| शहज़ाद क़ैस
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हया से झुकती निगाहों में!
क़रीना सरक़ा इशारा किनाया रम्ज़ सवाल, हया से झुकती निगाहों में झाँकते थे सभी| शहज़ाद क़ैस
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रुबाई नज़्म ग़ज़ल!
क़सीदा शे’र मुसद्दस रुबाई नज़्म ग़ज़ल, महकते होंटों की तफ़्सीर है भली से भली| शहज़ाद क़ैस