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पता नहीं…!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार, बिल्कुल अलग किस्म की कविताएं लिखने वाले कवि, जिनको अज्ञेय जी द्वारा संपादित प्रमुख काव्य संकलन ‘तारसप्तक’ में भी शामिल किया गया था, ऐसे स्वर्गीय गजानन माधव मुक्तिबोध जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|…
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मुहय्या क्यों करें हम!
चबा लें क्यों न ख़ुद ही अपना ढाँचा, तुम्हें रातिब मुहय्या क्यों करें हम| जौन एलिया
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पर्दा क्यों करें हम!
बरहना* हैं सर-ए-बाज़ार तो क्या, भला अंधों से पर्दा क्यों करें हम| *Naked जौन एलिया
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दुनिया की पर्वा क्यूँ!
नहीं दुनिया को जब पर्वा हमारी, तो फिर दुनिया की पर्वा क्यूँ करें हम| जौन एलिया
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इकट्ठा क्यों करें हम!
जो इक नस्ल-ए-फ़रोमाया* को पहुँचे, वो सरमाया इकट्ठा क्यों करें हम| *Mean जौन एलिया
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क्यों न फेंकें सारी चीज़ें
उठा कर क्यों न फेंकें सारी चीज़ें, फ़क़त कमरों में टहला क्यों करें हम| जौन एलिया
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किया था अह्द जब!
किया था अह्द जब लम्हों में हम ने, तो सारी उम्र ईफ़ा* क्यूँ करें हम| *प्रतिज्ञा पालन जौन एलिया
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क्या बात करें?
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – घर की बात करें वे जो घर वाले हैंहम फुटपाथों पर बैठे क्या…
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वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी!
वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी मोहब्बत, अब इन लफ़्ज़ों का पीछा क्यूँ करें हम| जौन एलिया