Category: Uncategorized
-
मेघ मल्लार!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार अज्ञेय जी द्वारा संपादित प्रमुख काव्य संकलन ‘तारसप्तक’ में भी शामिल कवि स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की यह कविता – मालव…
-
और लहजा भी गया!
साथ ‘ग़ालिब’ के गई फ़िक्र की गहराई भी, और लहजा भी गया ‘मीर-तक़ी-मीर’ के साथ| राजेश रेड्डी
-
किसी ज़ंजीर के साथ!
आदमी ही के बनाए हुए ज़िंदाँ हैं ये सब, कोई पैदा नहीं होता किसी ज़ंजीर के साथ| राजेश रेड्डी
-
ख़्वाब आते ही कहाँ!
छोड़ जाते हैं हक़ीक़त के जहाँ में हमें फिर, ख़्वाब आते ही कहाँ हमें कभी ताबीर के साथ| राजेश रेड्डी
-
मिरी तामीर के साथ
मिरे होने में न होने का था सामाँ मौजूद, टूटना मेरा लिखा था मिरी तामीर के साथ| राजेश रेड्डी
-
मिरी तदबीर के साथ!
है कोई बैर सा उस को मिरी तदबीर के साथ, अब कहाँ तक कोई झगड़ा करे तक़दीर के साथ| राजेश रेड्डी