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वृक्षत्व!
अज्ञेय जी द्वारा संपादित दूसरा सप्तक के कवियों की रचनाएं शेयर करने के क्रम में आज स्वर्गीय नरेश मेहता जी की एक और कविता शेयर कर रहा हूँ| मेहता जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेश मेहता जी की यह कविता – माधवी के नीचे…
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रात गहरे अज़ाब जैसी!
वो दिन था दोज़ख़ की आग जैसा, वो रात गहरे अज़ाब* जैसी| *Punishment मुनीर नियाज़ी