वृक्षत्व!

अज्ञेय जी द्वारा संपादित दूसरा सप्तक के कवियों की रचनाएं शेयर करने के   क्रम में आज स्वर्गीय नरेश मेहता जी की एक और कविता शेयर कर रहा हूँ|

मेहता जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेश मेहता जी की यह कविता –

माधवी के नीचे बैठा था

कि हठात् विशाखा हवा आयी

और फूलों का एक गुच्छ

मुझ पर झर उठा;

माधवी का यह वृक्षत्व

मुझे आकण्ठ सुगंधित कर गया ।

उस दिन

एक भिखारी ने भीख के लिए ही तो गुहारा था

और मैंने द्वाराचार में उसे क्या दिया ?-

उपेक्षा, तिरस्कार

और शायद ढेर से अपशब्द ।

मेरे वृक्षत्व के इन फूलों ने

निश्चय ही उसे कुछ तो किया ही होगा,

पर सुगंधित तो नहीं की ।

सबका अपना-अपना वृक्षत्व है ।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

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2 responses to “वृक्षत्व!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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