Category: Uncategorized
-
जो भी चल निकली!
अब वही हर्फ़-ए-जुनूँ सब की ज़बाँ ठहरी है,जो भी चल निकली है वो बात कहाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
इक सुख़न और कि!
इक सुख़न और कि फिर रंग-ए-तकल्लुम* तेरा,हर्फ़-ए-सादा को इनायत करे ए’जाज़ का रंग| *Talking, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
दिल ने लय बदली तो!
चंग ओ नय* रंग पे थे अपने लहू के दम से,दिल ने लय बदली तो मद्धम हुआ हर साज़ का रंग|*Music and Dance फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
बाहर खेती-बारी रख!
आज एक बार फिर मैं, विख्यात कवि एवं राजनेता श्री उदयप्रताप सिंह जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| उदयप्रताप जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदयप्रताप सिंह जी कि यह ग़ज़ल – बाहर खेती-बारी रखआँगन में फुलवारी रख थोड़ी दुनिया दारी रखप्यार मुहब्बत जारी…
-
शीशा-ए-मय में!
बे-पिए हूँ कि अगर लुत्फ़ करो आख़िर-ए-शब, शीशा-ए-मय में ढले सुब्ह के आग़ाज़ का रंग| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
तिरी आवाज़ का रंग!
साया-ए-चश्म में हैराँ रुख़-ए-रौशन का जमाल,सुर्ख़ी-ए-लब में परेशाँ तिरी आवाज़ का रंग| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
यूँ सजा चाँद कि!
यूँ सजा चाँद कि झलका तिरे अंदाज़ का रंग,यूँ फ़ज़ा महकी कि बदला मिरे हमराज़ का रंग| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
दर्द सोया भी नहीं था!
वो सितम-केश बहर-हाल सितम-केश रहे,दर्द सोया भी नहीं था कि जगाने निकले| रज़ा अमरोहवी
-
यादों के ख़ज़ाने!
जिन किताबों पे सलीक़े से जमी वक़्त की गर्द,उन किताबों ही में यादों के ख़ज़ाने निकले| रज़ा अमरोहवी