Category: Uncategorized
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शिकवा हज़ार बार किया!
तुम्हारा ज़िक्र नहीं है तुम्हारा नाम नहीं, किया नसीब का शिकवा हज़ार बार किया| जोश मलीहाबादी
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वो सब्र दे कि न दे!
वो सब्र दे कि न दे जिस ने बे-क़रार किया, बस अब तुम्हीं पे चलो हम ने इंहिसार* किया| *Dependance जोश मलीहाबादी
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फागुन!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी का यह नवगीत – अरे ओ निरगुन फागुन मास!मेरे कारागृह के शून्य अजिर में मत कर…
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अजब मुसाफ़िर हूँ मैं!
अजब मुसाफ़िर हूँ मैं मेरा सफ़र अजीब, मेरी मंज़िल और है मेरा रस्ता और| राजेश रेड्डी
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किया ज़माने ने मुझ को!
सच कहने पर ख़ुश होना तो दूर रहा, किया ज़माने ने मुझ को शर्मिंदा और| राजेश रेड्डी
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मुझ में जाने क्या क्या और!
दरवाज़े के अंदर इक दरवाज़ा और, छुपा हुआ है मुझ में जाने क्या क्या और| राजेश रेड्डी
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बारिश में घर लौटा कोई!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ व्यंग्य कवि और गीतकार स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का यह नवगीत – बारिश में घर लौटा कोई दर्पण देख रहा न्यूटन जैसे पृथ्वी का आकर्षण देख…