Category: Uncategorized
-
बर्बाद घर हमारे हुए!
बुझा के ताक़ की शमएँ न देख तारों को,इसी जुनूँ में तो बर्बाद घर हमारे हुए| अहमद फ़राज़
-
चारागर हमारे हुए!
किसी ने ग़म तो किसी ने मिज़ाज-ए-ग़म बख़्शा,सब अपनी अपनी जगह चारागर हमारे हुए| अहमद फ़राज़
-
जिन्हें कोई न मिला!
अब इक हुजूम-ए-शिकस्ता-दिलाँ है साथ अपने,जिन्हें कोई न मिला हम-सफ़र हमारे हुए| अहमद फ़राज़
-
बात पर हमारे हुए!
जो ग़ैर थे वो इसी बात पर हमारे हुए,कि हम से दोस्त बहुत बे-ख़बर हमारे हुए| अहमद फ़राज़
-
इस क्षण!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| ओम प्रभाकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का यह नवगीत – इस क्षण यहाँ शान्त है जल। पेड़ गड़े हैं,घास जड़ी।हवा सामने…