Category: Uncategorized
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खोने को पाने आये हो!
आज एक बार फिर मैं अत्यंत वरिष्ठ राष्ट्रीय कवि स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की यह कविता – खोने को पाने आये हो?रूठा यौवन पथिक, दूर तकउसे मनाने आये हो?खोने को पाने…
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उम्र के साथ अजीब!
उम्र के साथ अजीब सा बन जाता है आदमी, हालत देख के दुख हुआ आज उस परी-जमाल की| मुनीर नियाज़ी
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शाम झुकी थी बहर पर
शाम झुकी थी बहर पर पागल हो कर रंग से, या तस्वीर थी ख़्वाब में मेरे किसी ख़याल की| मुनीर नियाज़ी
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दहशत थी भौंचाल की
शहर में डर था मौत का चाँद की चौथी रात को, ईंटों की इस खोह में दहशत थी भौंचाल की| मुनीर नियाज़ी
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रेशम के रूमाल की!
महक अजब सी हो गई पड़े पड़े संदूक़ में, रंगत फीकी पड़ गई रेशम के रूमाल की| मुनीर नियाज़ी
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यही सदा घड़ियाल की
आई है अब याद क्या रात इक बीते साल की, यही हवा थी बाग़ में यही सदा घड़ियाल की| मुनीर नियाज़ी
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चलो घूम आएँ!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि और समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादक मण्डल में शामिल स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता – उठो, कब…
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ख़ुश हुए कुछ रंजूर हुए
हम उन से जो मिल कर दूर हुए कुछ ख़ुश हुए कुछ रंजूर हुए, अब दिल का ठिकाना मुश्किल है हाँ जान रहेगी ऐमन में| इब्न-ए-इंशा
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फूल बने जा गुलशन में
कुछ वो जिन्हें हम से निस्बत थी उन कूचों में आन आबाद हुए, कुछ अर्श पे तारे कहलाए कुछ फूल बने जा गुलशन में| इब्न-ए-इंशा
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फूल खिले पैराहन में!
उस हुस्न के नाम पे याद आए सब मंज़र ‘फ़ैज़’ की नज़्मों के, वही रंग-ए-हिना वही बंद-ए-क़बा वही फूल खिले पैराहन में| इब्न-ए-इंशा