Category: Uncategorized
-
अब गिला भी नहीं!
कभी जो तल्ख़-कलामी थी वो भी ख़त्म हुई, कभी गिला था हमें उन से अब गिला भी नहीं| जावेद अख़्तर
-
कभी मिला भी नहीं!
कभी तो बात की उस ने कभी रहा ख़ामोश, कभी तो हँस के मिला और कभी मिला भी नहीं| जावेद अख़्तर
-
कुछ हुआ भी नहीं!
कभी ये लगता है अब ख़त्म हो गया सब कुछ, कभी ये लगता है अब तक तो कुछ हुआ भी नहीं| जावेद अख़्तर
-
तिरा तो कोई ख़ुदा है!
मैं कब से कितना हूँ तन्हा तुझे पता भी नहीं, तिरा तो कोई ख़ुदा है मिरा ख़ुदा भी नहीं| जावेद अख़्तर
-
गत और आगत!
आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध हिन्दी गीतकार और संपादक श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| राही जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – जाने वाले का दर्द नहीं मिटता परआने वाले का चाव…