Category: Uncategorized
-
जीवन से ले गया वो!
अब क्या है अर्थ-हीन सी पुस्तक है ज़िंदगी, जीवन से ले गया वो कई दिन निकाल के| कृष्ण बिहारी नूर
-
हैं उस के पास आइने!
मौसम हैं दो ही इश्क़ के सूरत कोई भी हो, हैं उस के पास आइने हिज्र-ओ-विसाल के| कृष्ण बिहारी नूर
-
गाढ़ी कमाई है ज़िंदगी!
पिछले जन्म की गाढ़ी कमाई है ज़िंदगी, सौदा जो करना करना बहुत देख-भाल के| कृष्ण बिहारी नूर
-
ऐ मेरी आरज़ू !
ऐसा न हो गुनाह की दलदल में जा फँसूँ, ऐ मेरी आरज़ू मुझे ले चल सँभाल के| कृष्ण बिहारी नूर
-
लफ़्ज़ों के ये नगीने तो!
लफ़्ज़ों के ये नगीने तो निकले कमाल के, ग़ज़लों ने ख़ुद पहन लिए ज़ेवर ख़याल के| कृष्ण बिहारी नूर
-
वह चिड़िया जो!
आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की यह कविता – वह चिड़िया जो-चोंच मार करदूध-भरे जुंडी के दानेरुचि से, रस से खा लेती हैवह छोटी संतोषी…
-
आते आते यूँ ही!
आते आते यूँही दम भर को रुकी होगी बहार, जाते जाते यूँही पल भर को ख़िज़ाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
बुलबुल की ज़बाँ!
दस्त-ए-सय्याद भी आजिज़ है कफ़-ए-गुल-चीं भी, बू-ए-गुल ठहरी न बुलबुल की ज़बाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
दिल से निकली है तो!
बिखरी इक बार तो हाथ आई है कब मौज-ए-शमीम, दिल से निकली है तो कब लब पे फ़ुग़ाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
निगह-ए-शौक़ घड़ी भर!
है वही आरिज़-ए-लैला वही शीरीं का दहन, निगह-ए-शौक़ घड़ी भर को जहाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़