Category: Uncategorized
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राहत-ए-जाँ ठहरी है!
आज तक शैख़ के इकराम में जो शय थी हराम, अब वही दुश्मन-ए-दीं राहत-ए-जाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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जो भी चल निकली है!
अब वही हर्फ़-ए-जुनूँ सब की ज़बाँ ठहरी है, जो भी चल निकली है वो बात कहाँ ठहरी है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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कौन क़ातिल बचा है!
कौन क़ातिल बचा है शहर में ‘फ़ैज़’, जिस से यारों ने रस्म-ओ-राह न की| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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सपने!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी नवगीत के अप्रतिम हस्ताक्षर स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत – पँखों भर आकाश बाँध करसपने ! बहुत बड़े हो जाते…
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ये दौर किस तरह से!
ये दौर किस तरह से कटेगा पहाड़ सा, यारो बताओ हम में कोई कोहकन* भी है| *पर्वत खोदने वाला जाँ निसार अख़्तर
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सिर्फ़ रंग-ओ-बू नहीं!
बाज़ू छुआ जो तू ने तो उस दिन खुला ये राज़, तू सिर्फ़ रंग-ओ-बू ही नहीं है बदन भी है| जाँ निसार अख़्तर