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वरना,शिखर कौन सा है!
आज एक बार फिर मैं अपने समय में हिन्दी काव्य मंचों के अत्यंत लोकप्रिय और श्रेष्ठ कवि रहे स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सरोज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी का यह गीत –…
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चुप-चाप अपनी आग!
चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो ‘फ़राज़’,दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे| अहमद फ़राज़
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अब कोई हादसा ही!
तुझ को भुला के दिल है वो शर्मिंदा-ए-नज़र,अब कोई हादसा ही तिरे रू-ब-रू करे| अहमद फ़राज़
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कौन तिरी जुस्तुजू करे!
तेरे बग़ैर भी तो ग़नीमत है ज़िंदगी,ख़ुद को गँवा के कौन तिरी जुस्तुजू करे| अहमद फ़राज़
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पर दिल ये चाहता है!
अब तो हमें भी तर्क-ए-मरासिम का दुख नहीं, पर दिल ये चाहता है कि आग़ाज़ तू करे| अहमद फ़राज़
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दिल को लहू करे!
क्या ऐसे कम-सुख़न से कोई गुफ़्तुगू करे,जो मुस्तक़िल सुकूत से दिल को लहू करे| अहमद फ़राज़
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देखो तो कितने शहर!
रोते हो इक जज़ीरा-ए-जाँ को ‘फ़राज़’ तुम,देखो तो कितने शहर समुंदर के हो गए| अहमद फ़राज़
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पुरानी पड़ी बीन पर राग नूतन!
आज एक बार फिर मैं अपने समय में हिन्दी काव्य मंचों के अत्यंत लोकप्रिय और श्रेष्ठ कवि रहे स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत –…