Category: Uncategorized
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दुख नदी-भर!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय हरीश निगम जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। निगम जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय हरीश निगम जी का यह नवगीत – सुख अंजुरि-भरदुख नदी-भरजी रहेदिन-रात सीकर! ढही भीतीउड़ी छानीमेह सूखेआँख पानी फड़फड़ातेमोर-तीतर! हैं हवा केहोंठ दरकेफटे रिश्तेगाँव-घर…
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मिट्टी में मिली मिट्टी!
हर एक सिकन्दर का अन्जाम यही देखा,मिट्टी में मिली मिट्टी, पानी में मिला पानी। सूर्यभानु गुप्त
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रातों का तसव्वुर है!
आज मैं विख्यात शायर स्वर्गीय साग़र निज़ामी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ। साग़र निज़ामी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय साग़र निज़ामी जी की यह ग़ज़ल – रातों का तसव्वुर है उनका और चुपके-चुपके रोना है ।ऐ सुब्ह के तारे तू ही…
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काँधों पे रहा चेहरा!
जन्नत थी मगर हमको झुक कर न उठानी थी,काँधों पे रहा चेहरा, चेहरे पे रहा पानी। सूर्यभानु गुप्त