Category: Uncategorized
-
वही सवाल मियाँ !
बस एक सुकूत* ही जिस का जवाब होना था,वही सवाल मियाँ बार बार क्या करते|*मौन अज़हर इक़बाल
-
तिरे बग़ैर समुंदर को!
सफ़ीना ग़र्क़ ही करना पड़ा हमें आख़िर,तिरे बग़ैर समुंदर को पार क्या करते| अज़हर इक़बाल
-
तेरे हिसार से ख़ुद को !
हुई न ख़त्म तेरी रहगुज़ार क्या करते,तेरे हिसार* से ख़ुद को फ़रार क्या करते|*किला, अहाता अज़हर इक़बाल
-
कोई टूटा हुआ पत्ता!
पहन लेती हैं जब शाख़ें हरे मौसम के पैराहन,कोई टूटा हुआ पत्ता उठा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर
-
मैं उस बेदर्द के दिल को!
कभी करना हो अंदाज़ा जब अपने दर्द का मुझ को,मैं उस बेदर्द के दिल को दुखा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर
-
तेरी दुनिया में दिल लगता नहीं!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- तेरी दुनिया में दिल लगता नहीं, वापस बुला ले मैं सजदे में गिरा हूँ!फिल्म- बावरे नैनमुख्य कलाकार- राज कपूर, नर्गिस गीतकार- केदार शर्मा संगीतकार- रोशन गायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
-
घोर धनुर्धर, बाण तुम्हारा!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय गजानन माधव मुक्तिबोध जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मुक्तिबोध जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय गजानन माधव मुक्तिबोध जी की यह कविता- घोर धनुर्धर, बाण तुम्हारा सब प्राणों को पार करेगातेरी प्रत्यंचा का कम्पन सूनेपन का भार हरेगाहिमवत,…
-
जिसे पाया नहीं उसको!
जिसे देखा नहीं रोता हूँ उस की याद में शब-भर,जिसे पाया नहीं उस को गँवा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर
-
मैं अपना अक्स पानी में!
नहीं मिलता कहीं जब अपनी हस्ती का निशाँ मुझ को,मैं अपना अक्स पानी में बहा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर