हुई न ख़त्म तेरी रहगुज़ार क्या करते,
तेरे हिसार* से ख़ुद को फ़रार क्या करते|
*किला, अहाता
अज़हर इक़बाल
A sky full of cotton beads like clouds
हुई न ख़त्म तेरी रहगुज़ार क्या करते,
तेरे हिसार* से ख़ुद को फ़रार क्या करते|
*किला, अहाता
अज़हर इक़बाल
Leave a comment