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मैं अपना अक्स पानी में!
नहीं मिलता कहीं जब अपनी हस्ती का निशाँ मुझ को,मैं अपना अक्स पानी में बहा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर
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सजा कर देख लेता हूँ!
जिसे देखा नहीं है देख कर भी मेरी आँखों ने,मैं उस को अपने ख़्वाबों में सजा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर
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मैं अपना नाम लिखकर!
नज़र आता नहीं जब हर्फ़ कोई लौह-ए-आलम पर,मैं अपना नाम लिख कर और मिटा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर
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दूर जाकर देख लेता हूँ!
छुपाता है बहुत मुझ को मिरा साया मगर फिर भी,मैं ख़ुद को रौशनी से दूर जा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर
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कोई हमदम न रहा!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा !फिल्म- झुमरू का गीत मुख्य कलाकार- किशोर कुमार, मधुबाला गीतकार- मजरुह सुल्तानपुरी संगीतकार- किशोर कुमार गायक- किशोर कुमार प्रस्तुति-श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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नवीन कल्पना करो!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की यह कविता- निज राष्ट्र के शरीर के सिंगार के लिएतुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो,तुम कल्पना करो। अब…
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शक्लें बना कर देख लेता हूँ!
बहुत बेचैन कर देती हैं जब तन्हाइयाँ घर की,दर-ओ-दीवार पर शक्लें बना कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर
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कभी हँस कर कभी आँसू!
कभी हँस कर कभी आँसू बहा कर देख लेता हूँ,मैं हर चेहरे को आईना दिखा कर देख लेता हूँ| नज़ीर क़ैसर