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ख़ुशबू-ए-आवारा!
हम ख़ुशबू-ए-आवारा हम नूर-ए-परेशाँ हैं,ऐ ‘बद्र’ मुक़द्दर में आशुफ़्ता-बयानी है| बशीर बद्र
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वो मिस्रा-ए-आवारा!
वो मिस्रा-ए-आवारा दीवानों पे भारी है,जिस में तिरे गेसू की बे-रब्त कहानी है| बशीर बद्र
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वो हुस्न जिसे हमने!
वो हुस्न जिसे हम ने रुस्वा किया दुनिया में,नादीदा हक़ीक़त है ना-गुफ़्ता कहानी है| बशीर बद्र
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यादों की कहानी है!
दिन तल्ख़ हक़ाएक़ के सहराओं का सूरज है,शब गेसु-ए-अफ़्साना यादों की कहानी है| बशीर बद्र
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क्या जान गँवानी है!
इस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहना,हँस कर कोई पूछेगा क्या जान गँवानी है| बशीर बद्र
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काफिला आवाज़ का!
आज मैं हिंदी नवगीत विधा के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय देवेंद्र शर्मा इंद्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। इंद्र जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। मेरा सौभाग्य है कि मुझे स्वर्गीय इंद्र जी का भरपूर स्नेह प्राप्त हुआ था। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय देवेंद्र शर्मा इंद्र जी का…
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आँसू कभी शीशा है!
ग़म वज्ह-ए-फ़िगार-ए-दिल ग़म वज्ह-ए-क़रार-ए-दिल, आँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी है| बशीर बद्र
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ये मुल्क-ए-जवानी है!
ऐ पीर-ए-ख़िरद-मंदाँ दिल की भी ज़रूरत है,ये शहर-ए-ग़ज़ालाँ है ये मुल्क-ए-जवानी है| बशीर बद्र