ख़ुशबू-ए-आवारा!

हम ख़ुशबू-ए-आवारा हम नूर-ए-परेशाँ हैं,
ऐ ‘बद्र’ मुक़द्दर में आशुफ़्ता-बयानी है|

बशीर बद्र

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