Category: Uncategorized
-
किताब
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय नंद चतुर्वेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नंद चतुर्वेदी जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नंद चतुर्वेदी जी की यह कविता – उस तरह मैं नहीं पढ़ सकाजिस तरह चाहिएइस किताब में लिखी इबारत यह किताब…
-
उन से मिल कर भी!
कुछ समझ में नहीं आता कि ये क्या है ‘हसरत’,उन से मिल कर भी न इज़हार-ए-तमन्ना करना। हसरत मोहानी
-
शिकवा है गुनाह!
आशिक़ो हुस्न-ए-जफ़ाकार का शिकवा है गुनाह,तुम ख़बरदार ख़बरदार न ऐसा करना। हसरत मोहानी
-
ज़िक्र उन्हीं का करना!
शाम हो या कि सहर याद उन्हीं की रखनी,दिन हो या रात हमें ज़िक्र उन्हीं का करना। हसरत मोहानी