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काफिला आवाज का!
आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि तथा नवगीत के एक प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय देवेन्द्र शर्मा इन्द्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे इन्द्र जी का भरपूर स्नेह और मार्गदर्शन मिला परंतु उनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय देवेन्द्र शर्मा इन्द्र…
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ज़मीं की धूल भी!
चमकते चाँद-सितारों का क्या भरोसा है,ज़मीं की धूल भी अपनी उड़ान में रखना| निदा फ़ाज़ली
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मंज़िल गुमान में!
सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना,क़दम यक़ीन में मंज़िल गुमान में रखना| निदा फ़ाज़ली
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पर्वत पर आग जला!
आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| ठाकुर प्रसाद सिंह जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह जी का यह नवगीत – पर्वत पर आग जला बासन्ती रात मेंनाच रहे हैं हम-तुम…
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इश्क़ का मारा जाने है!
क्या क्या फ़ित्ने सर पर उस के लाता है माशूक़ अपना,जिस बे-दिल बे-ताब-ओ-तवाँ को इश्क़ का मारा जाने है| मीर तक़ी मीर