Category: Uncategorized
-
मिरी ग़म की रात भी!
न कोई ख़ुशी न मलाल है कि सभी का एक सा हाल है,तिरे सुख के दिन भी गुज़र गए मिरी ग़म की रात भी कट गई| बशीर बद्र #Happiness, #Grief #Night
-
रौशनाई उलट गई!
मुझे लिखने वाला लिखे भी क्या मुझे पढ़ने वाला पढ़े भी क्या,जहाँ मेरा नाम लिखा गया वहीं रौशनाई उलट गई| बशीर बद्र #WritingMe, #ReadingMe #MyName, #InkSpreads
-
बदन से लिपट गई!
तिरी याद आए तो चुप रहूँ ज़रा चुप रहूँ तो ग़ज़ल कहूँ,ये ‘अजीब आग की बेल थी मिरे तन-बदन से लिपट गई| बशीर बद्र #Memories #Silence, #WritingGhazal #CreeperOfFire
-
एक मुट्ठी ज़मीन दे!
मिरी ज़िंदगी भी मिरी नहीं ये हज़ार ख़ानों में बट गई,मुझे एक मुट्ठी ज़मीन दे ये ज़मीन कितनी सिमट गई| बशीर बद्र #Earth, #Life, #Shrinked, #DividedThousandTimes
-
कन्याकुमारी : सूर्योदय : सूर्यास्त
आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| दूधनाथ सिंह जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की यह कविता – काले समन्दर में अचानक एक लाल स्तम्भ उगता है । लहर-लहर मारती है गैंती–टूटकर…
-
कौन है किस जगह!
उम्र करने को है पचास को पार,कौन है किस जगह पता रखना| निदा फ़ाज़ली ##Aging #KeepTrack #People
-
हौसला रखना!
मिलना-जुलना जहाँ ज़रूरी है,मिलने-जुलने का हौसला रखना| निदा फ़ाज़ली #MeetingPeople #CourageToMeet
-
तन्हाइयाँ बचा रखना!
जिस्म में फैलने लगा है शहर,अपनी तन्हाइयाँ बचा रखना| निदा फ़ाज़ली #CitySpreading #Body #AloneBeing
-
अपने घर में कहीं!
मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिए,अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना| निदा फ़ाज़ली #Mosques, #ReligeousPeople #KeepGodAtHome
-
काफिला आवाज का!
आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि तथा नवगीत के एक प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय देवेन्द्र शर्मा इन्द्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे इन्द्र जी का भरपूर स्नेह और मार्गदर्शन मिला परंतु उनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय देवेन्द्र शर्मा इन्द्र…