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उन सियाह बालों में!
जैसे आधी शब के बा’द चाँद नींद में चौंके,वो गुलाब की जुम्बिश उन सियाह बालों में| बशीर बद्र
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फूल के प्यालों में!
यूँ किसी की आँखों में सुब्ह तक अभी थे हम,जिस तरह रहे शबनम फूल के प्यालों में| बशीर बद्र
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जैसे कोई चुटकी ले!
रात तेरी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ा, जैसे कोई चुटकी ले नर्म नर्म गालों में| बशीर बद्र
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आद्यंत-1
आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ साहित्यकार एवं कवि और धर्मयुग पत्रिका के संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भारती जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की यह कविता – जिन्दगी की डाल परकण्टकों के जाल…
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खो गए सवालों में!
पहली बार नज़रों ने चाँद बोलते देखा,हम जवाब क्या देते खो गए सवालों में| बशीर बद्र #MoonTalking, #NoReply #LostInQuestions
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तेरे शहर वालों में!
सौ ख़ुलूस बातों में सब करम ख़यालों में,बस ज़रा वफ़ा कम है तेरे शहर वालों में| बशीर बद्र #Regard, #Talks, #Ideas #Loyalty
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कच्ची नींद उचट गई!
मिरी बंद पलकों पे टूट कर कोई फूल रात बिखर गया,मुझे सिसकियों ने जगा दिया मिरी कच्ची नींद उचट गई| बशीर बद्र #ClosedEyelids, #Sleep, #Flower