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ख़ैरियत क्या पूछते हो!
ख़ैरियत क्या पूछते हो गेसू-ए-हालात की,वक़्त ही उलझा गया था वक़्त ही सुलझा गया| नज़ीर बनारसी
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वो दिवाना हर जगह!
आप ने अपनी ज़बाँ से जिस को अपना कह दिया,वो दिवाना हर जगह खोया हुआ पाया गया| नज़ीर बनारसी
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था मिरा चेहरा मगर!
आईना दिखलाने आए थे परेशानी के दिन,था मिरा चेहरा मगर मुझ से न पहचाना गया| नज़ीर बनारसी
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प्याला प्रेम का -3
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं सोम ठाकुर जी के इस मधुर गीत का तीसरा भाग अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, मैंने पूरा गीत भी एक साथ रिकॉर्ड किया जो मैं कल प्रस्तुत करूंगा- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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वो कहीं पाए गए!
इंक़िलाब-ए-दहर बर-हक़ लेकिन ऐसा इंक़लाब,वो कहीं पाए गए और मैं कहीं पाया गया| नज़ीर बनारसी
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ऐ ज़मीं तुझ को !
ऐ ज़मीं तुझ को मोहब्बत से बसाने के लिए,आसमानों की बुलंदी से मुझे फेंका गया| नज़ीर बनारसी
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मुझको इस रात की तनहाई में!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- दिल भी तेरा, हम भी तेरे’ के एक गीत का कुछ भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मुकेश जी और लता जी ने गाया था- मुझको इस रात की तनहाई में आवाज़ न दो! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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उम्र भर की बात बिगड़ी!
उम्र भर की बात बिगड़ी इक ज़रा सी बात में,एक लम्हा ज़िंदगी भर की कमाई खा गया| नज़ीर बनारसी
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हर ओर कलियुग के चरण!
सभी को पुनीत पर्व होली की हार्दिक शुभ कामनाएं। आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। भारत भूषण जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत भूषण जी का यह गीत– हर ओर कलियुग…
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एक झोंका इस तरह!
एक झोंका इस तरह ज़ंजीर-ए-दर खड़का गया, मैं ये समझा भूलने वाले को मैं याद आ गया| नज़ीर बनारसी