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एक मासूम मोहब्बत!
वो मिरी दोस्त वो हमदर्द वो ग़म-ख़्वार आँखें,एक मासूम मोहब्बत की गुनहगार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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पलटना चाहें वहाँ से!
न जा कि इस से परे दश्त-ए-मर्ग हो शायद,पलटना चाहें वहाँ से तो रास्ता ही न हो| मुनीर नियाज़ी
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ज़मीं के गिर्द भी पानी!
ज़मीं के गिर्द भी पानी ज़मीं की तह में भी,ये शहर जम के खड़ा है जो तैरता ही न हो| मुनीर नियाज़ी
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दिखाई देता है जो !
निगाह-ए-आईना मालूम अक्स ना-मालूम,दिखाई देता है जो असल में छुपा ही न हो| मुनीर नियाज़ी
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कहीं हवा ही न हो!
सफ़र में है जो अज़ल से ये वो बला ही न हो,किवाड़ खोल के देखो कहीं हवा ही न हो| मुनीर नियाज़ी
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राधिका दिल से – जुमांजी
ऊपर जो शीर्षक दिया गया है उसमें टी वी पर देखे जाने वाले दो कार्यक्रमों के नाम हैं, एक टी वी सीरियल है ‘राधिका दिल से’ जो सोनी टीवी पर आजकल दिखाया जा रहा है और दूसरी एक अमेरिकन फिल्म है ‘JUMANJI’ जिसके शायद तीन भाग दिखाए जा चुके हैं और चौथा भाग रिलीज़ होने…
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आंगन का पंछी!
आज मैं श्रेष्ठ नवगीत कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत– आँगन का पंछी चढ़ा मुड़ेरे परजंगल को अपना घर बतलाता हैकुछ ऐसी हवा बही ज़हरीली-सीसारा का सारा…
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होते होते जीने के भी!
हम भी ‘मुनीर’ अब दुनिया-दारी कर के वक़्त गुज़ारेंगे,होते होते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी
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राज़ छुपाने आ जाते!
ज़े के रेशमी रुमालों को किस किस की नज़रों से छुपाएँ,कैसे हैं वो लोग जिन्हें ये राज़ छुपाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी
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कौन सा वो जादू है!
कौन सा वो जादू है जिस से ग़म की अँधेरी सर्द गुफा में,लाख निसाई साँस दिलों के रोग मिटाने आ जाते हैं| मुनीर नियाज़ी