Category: Uncategorized
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अच्छी भली थी दुनिया!
अच्छी भली थी दुनिया गुज़ारे के वास्ते,उलझे हुए हैं अपनी ही ख़ुद-आगही से हम| निदा फ़ाज़ली
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शाइस्ता महफ़िलों की !
शाइस्ता महफ़िलों की फ़ज़ाओं में ज़हर था,ज़िंदा बचे हैं ज़ेहन की आवारगी से हम| निदा फ़ाज़ली
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अच्छे बुरे के फ़र्क़ ने!
अच्छे बुरे के फ़र्क़ ने बस्ती उजाड़ दी, मजबूर हो के मिलने लगे हर किसी से हम| निदा फ़ाज़ली
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सब्ज़ा ओ गुल कहां से आए हैं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मिर्ज़ा ग़ालिब जी की ग़ज़ल के दो और शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ – सब्ज़ा ओ गुल कहां से आए हैंअब्र क्या चीज़ है, हवा क्या है! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******
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ओ मेरे विशेषण!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की यह कविता – हर विशेषण विशेष्य को कमज़ोर करता हैक्योंकि वह उसे अपना मुहताज बना लेता हैइसीलिए तो, मेरे…
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मुझ को शिकवा है!
कर दिया गर्दिश-ए-अय्याम ने रुस्वा ‘साहिर’,मुझ को शिकवा है यगाने से न बेगाने से| साहिर होशियारपुरी
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जाने क्या बात कही!
हो गया ढेर वहीं आह भी निकली न कोई, जाने क्या बात कही शम्अ‘ ने परवाने से| साहिर होशियारपुरी