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प्यार की बोली, बोले कौन!
आज एक बार फिर से मैं, अपनी कविताओं, नज़्मों, कहानियों और उपन्यासों में बड़ी सादगी से बड़ी बातें कहने वाले ज़नाब राही मासूम रज़ा साहब की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| उनका एक प्रसिद्ध उपन्यास है ‘दिल एक सादा कागज़’ मुझे याद है उनके उपन्यास पढ़ते हुए भी ऐसा लगता था जैसे कोई कविता…
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चूड़ियाँ, मौसीकियाँ, शहनाइयाँ!
मेरे दिल की धड़कनों में ढल गई,चूड़ियाँ, मौसीकियाँ, शहनाइयाँ| कैफ़ भोपाली
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बदलियाँ, बरखा रूतें, पुरवाइयाँ!
ज़ख्म दिल के फिर हरे करने लगी,बदलियाँ, बरखा रूतें, पुरवाइयाँ| कैफ़ भोपाली
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शाहियाँ, सुल्तानियाँ, दराइयाँ!
एक रिंद-ए-मस्त की ठोकर में है,शाहियाँ, सुल्तानियाँ, दराइयाँ| कैफ़ भोपाली
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करवटें, बेताबियाँ, अँगड़ाइयाँ!
क्या ज़माने में यूँ ही कटती है रात,करवटें, बेताबियाँ, अँगड़ाइयाँ| कैफ़ भोपाली
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चेतावनी!
एक बार फिर से मैं आज श्रेष्ठ कवि, गीतकार श्री सत्यनारायण जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ, जो पटना निवासी हैं, शत्रुघ्न सिन्हा जी के पडौसी और मित्र हैं और मुझको, उनको अपना मित्र कहने में गर्व का अनुभव होता है| यद्यपि 11 साल पहले एनटीपीसी से सेवानिवृत्त होने के और गोवा में…