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आख़िर वो नाम किसका था!
तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था, न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था| दाग़ देहलवी
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हमने अपना सब कुछ खोया!
आज फिल्म- ‘सरस्वतीचन्द्र’ के लिए इंदीवर जी का लिखा एक प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ जिसे मुकेश जी ने अपने अनूठे अंदाज़ में गाया था| फिल्म- सरस्वतीचन्द्र के लिए कल्याणजी आनंदजी द्वारा संगीतबद्ध किए गए कई गीत काफी प्रसिद्ध हुए थे, जिनमें – ‘फूल तुम्हें भेजा है खत में’, ‘मैं तो भूल चली बाबुल…
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उसको भूल जाने में!
दूसरी कोई लड़की, ज़िंदगी में आएगी,कितनी देर लगती है, उसको भूल जाने में| बशीर बद्र
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फ़ाख़्ता की मजबूरी!
फ़ाख़्ता की मजबूरी ,ये भी कह नहीं सकती,कौन साँप रखता है, उसके आशियाने में| बशीर बद्र
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दिल को दिल बनाने में!
हर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैं,उम्र बीत जाती है, दिल को दिल बनाने में| बशीर बद्र