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ख़ामोशी पहचाने कौन 1
मुँह की बात सुने हर कोईदिल के दर्द को जाने कौनआवाज़ों के बाज़ारों मेंख़ामोशी पहचाने कौन । निदा फाज़ली
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क्यों विष जान पिया करता है!
आज मैं स्वर्गीय बलबीर सिंह जी ‘रंग’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| ‘रंग’ जी अपनी अलग प्रकार की अभिव्यक्ति शैली के लिए जाने जाते थे| इस गीत में ‘रंग’ जी ने अपने अंदाज़ में यह कहा है कि कवि गीत क्यों लिखता है| बलबीर सिंह ‘रंग’ जी की बहुत लोकप्रिय पंक्तियाँ जो मैं…
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फिर नशे में 4
मुझको कदम कदम पे भटकने दो वाइजोंतुम अपना कारोबार करो मैं नशे में हूँ| फिर बेख़ुदी में हद से गुजरने लगा हूँ मैंइतना न मुझ से प्यार करो मैं नशे में हूँ| शाहिद कबीर
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फिर नशे में 3
गिरने दो तुम मुझे मेरा साग़र संभाल लो इतना तो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ | शाहिद कबीर
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फिर नशे में 1
ठुकराओ अब कि प्यार करो मैं नशे में हूँ ,जो चाहो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ | शाहिद कबीर
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दूर से देखता हूँ – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी…
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मैं नशे में हूँ 2
ढल चुकी है रात कब की, उठ गई महफ़िल,मैं कहाँ जाऊं नहीं मेरी कोई मंजिल,दो क़दम मुश्किल है चलना मैं नशे में हूँ!
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मैं नशे में हूँ 1
है ज़रा सी बात और छलके हैं कुछ प्याले,पर न जाने क्या कहेंगे ये जहां वाले,तुम बस इतना याद रखना, मैं नशे में हूँ!
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मैं नशे में हूँ!
कल की यादें मिट चुकी हैं, दर्द भी है कम, अब ज़रा आराम से आ जा रहा है दम,कम है अब दिल का तड़पना, मैं नशे में हूँ!