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प्यार की बोली बोले कौन!
लोग अपनों के खूँ में नहाकर, गीता और कुरान पढ़ें,प्यार की बोली याद है किसको, प्यार की बोली बोले कौन। राही मासूम रज़ा
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यह कड़वा सच बोले कौन!
काली रात के मुँह से टपके, जाने वाली सुबह का जूनून,सच तो यही है, लेकिन यारों, यह कड़वा सच बोले कौन| राही मासूम रज़ा
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पर ये दुकानें खोले कौन!
सारा नगर तो ख्वाबों की मैयत लेकर के श्मशान गया,दिल की दुकानें बंद पड़ी हैं, पर ये दुकानें खोले कौन| राही मासूम रज़ा
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इस पे दिलों को तौले कौन!
सब डरते हैं, आज हवस के इस सहरा में बोले कौन,इश्क तराजू तो है, लेकिन, इस पे दिलों को तौले कौन| राही मासूम रज़ा
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हमको कोई घर ले जाए!
हम भी हैं बनवास में लेकिन राम नहीं हैं राहीआए अब समझाकर हमको कोई घर ले जाए ।। राही मासूम रज़ा
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जाने क्या बातें करते हैं!
इतने शोर में दिल से बातें करना है नामुमकिनजाने क्या बातें करते हैं आपस में हमसाए।। राही मासूम रज़ा
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जब सच बोलें तब झूठे कहलाए!
हम भी कैसे दीवाने हैं किन लोगों में बैठे हैंजान पे खेलके जब सच बोलें तब झूठे कहलाए। राही मासूम रज़ा
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जिनमें नींद ना आए!
क्या वो दिन भी दिन हैं, जिनमें दिन भर जी घबराएक्या वो रातें भी रातें हैं जिनमें नींद ना आए। राही मासूम रज़ा
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प्रेम की गंगा बहाते चलो!
आज पंडित भारत व्यास जी का लिखा एक सुंदर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| भारत व्यास जी ने हमारी फिल्मों को बहुत से अमर गीत दिए हैं| आज मैं फिल्म- ‘संत ज्ञानेश्वर’ का यह गीत शेयर कर रहा हूँ जिसका संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी की प्रसिद्ध जोड़ी ने दिया था और इसको लता मंगेशकर जी…
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हम जान हार गुज़रे!
तूने भी हमको देखा, हमने भी तुझको देखा,तू दिल ही हार गुज़रा हम जान हार गुज़रे। मीना कुमारी