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गैर को दिल से लगा लिया!
फिर यूँ हुआ के गैर को दिल से लगा लिया,अंदर वो नफरतें थीं के बाहर के हो गये| अहमद फ़राज़
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उसी दर के हो गये!
तुझसे बिछड़ के हम भी मुकद्दर के हो गये,फिर जो भी दर मिला है उसी दर के हो गये| अहमद फ़राज़
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और वही यादें-यादें!
आज फिर दिल ने कहा आओ भुला दें यादें,ज़िंदगी बीत गई और वही यादें-यादें| अहमद फ़राज़
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हाल-चाल ठीक-ठाक है!
आज गुलज़ार साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ| गुलज़ार साहब शायरी में प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं, एक अनूठे अंदाज़ में वो अक्सर अपनी बात कह जाते हैं| गुलज़ार साहब का यह गीत फिल्म ‘मेरे अपने’ के लिए किशोर कुमार साहब और मुकेश जी के स्वरों में फिल्माया गया था…
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महफ़िले-जानाँ से उठ आए!
यार से हमको तगाफ़ुल का गिला है बेजा,बारहा महफ़िले-जानाँ से उठ आए ख़ुद भी| अहमद फ़राज़
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खिंचता चला आए ख़ुद भी!
लुत्फ़ तो जब है तअल्लुक़ में कि वो शहरे-जमाल,कभी खींचे कभी खिंचता चला आए ख़ुद भी| अहमद फ़राज़
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तो वो याद दिलाए ख़ुद भी!
ऐसा ज़ालिम कि अगर ज़िक्र में उसके कोई ज़ुल्म,हमसे रह जाए तो वो याद दिलाए ख़ुद भी| अहमद फ़राज़
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हमें याद न आए खुद भी!
कितने ग़म थे कि ज़माने से छुपा रक्खे थे,इस तरह से कि हमें याद न आए खुद भी| अहमद फ़राज़
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मंज़िल थे बजाए ख़ुद भी!
यूँ तुझे ढूँढ़ने निकले के न आए ख़ुद भी,वो मुसाफ़िर कि जो मंज़िल थे बजाए ख़ुद भी| अहमद फ़राज़