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जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे!
उम्र भर कौन निभाता है तअल्लुक़ इतना, ऐ मिरी जान के दुश्मन तुझे अल्लाह रक्खे| अहमद फ़राज़
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वो किसे प्यासा रक्खे!
हर कोई दिल की हथेली पे है सहरा रक्खे, किसको सैराब करे वो किसे प्यासा रक्खे| अहमद फ़राज़
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याद का आसरा!
आज एक बार फिर मैं स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| ‘नंदन’ जी एक श्रेष्ठ कवि और बच्चों की लोकप्रिय पत्रिका के संपादक थे| पहले भी मैंने नंदन जी की कुछ रचनाएं शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का यह सुंदर गीत– तेरी याद का…
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मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले!
बेलचे लाओ खोलो ज़मीं की तहें, मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले| कैफ़ी आज़मी
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बुझने दो उनको हवा तो चले!
चाँद सूरज बुज़ुर्गों के नक़्श-ए-क़दम, ख़ैर बुझने दो उनको हवा तो चले| कैफ़ी आज़मी
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ज़मीं पे नक़्श-ए-क़दम..
गुज़रने को तो हज़ारों ही क़ाफ़िले गुज़रे, ज़मीं पे नक़्श-ए-क़दम बस किसी किसी का रहा| कैफ़ी आज़मी
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मिरे घर में न रौशनी का रहा!
लबों से उड़ गया जुगनू की तरह नाम उसका, सहारा अब मिरे घर में न रौशनी का रहा| कैफ़ी आज़मी